DIL KA FASAANA...

दिल का फ़साना लीखने मैं चला,
तान्हायी को कागज पे लाने मैं चला॥
चमन से दूर, अपनों से जूदा,
दिल का आलम बताने मैं चला॥

ना ही अप्ने है, ना कोई दिल-ए-गुल्ज़ार यंहा॥
फिर भी कैसे कटती रोज़ी बताने मैं चला ॥
खामोश फिजा, अकेला आसमा,
अपनों के यादो के सहारे इस सफ़र पे चला हूँ,
कैसे कटती ये सफ़र जताने मैं चला ॥

ना घम बाट सकता हूँ, ना ख़ुशी यंहा ॥
कैसे कटती है जिन्दगी ये मैं अफ्सानो में लिखता हूँ ॥

यारो कि महफिल, अपनों का प्यार
माँ का दुलार, भाय से तकरार,
इन सबसे बिचाड के कैसा महसूस होता है॥

कभी कभी तुम सबकी याद मुझे बड़ा सताती है ॥
दिल का फ़साना लीखने मैं चला,
तान्हायी को कागज़ पे लाने मैं चला


तुम्हारा
-AkaTHarI
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